दार्जिलिंग जू में कैप्टिव ब्रीडिंग प्रणाली से रेड पांडा के दो शावकों ने लिया जन्म

दार्जिलिंग, 31 जुलाई (नि.सं.)। दार्जिलिंग का मशहूर चिड़ियाखाना पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क इन दिनों रेड पांडा को लेकर खासी सुर्खियों में है। देश में मशहूर यह जू वैसे तो हमेशा ही रेड पांडा की मौजूदगी को ले पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचता रहा है। अब हाल ही में रेड पांडा के दो शावकों के इस जू में जन्म लेने से पार्क का महत्व और बढ़ गया है। ज्ञात हो कि कैप्टिव ब्रीडिंग प्रणाली के माध्यम से इन दोनों शावकों ने यहां जन्म लिया है।


रेड पांडा के दोनों शावक क्रमशः प्रसन्ना और शिफू तथा शोभा और बालम के बच्चे हैं। इनमें से पहला शावक गत 6 जून को एवं दूसरे शावक ने गत 1 जुलाई को जन्म लिया। दार्जिलिंग जू के निदेशक राजेंद्र जाखड़ के अनुसार दोनों शावक स्वस्थ हैं। इन दोनों की मांए दोनों शावकों का अच्छा ख्याल रख रही हैं। उन्होंने कहा कि पार्क में रेड पांडा की संख्या और अधिक बढ़ाने के लिये कैप्टिव ब्रीडिंग प्रणाली के तहत तीन जोड़े रेड पांडा को तैयार किया गया था, जिसमें से दो मांओं ने ही शावकों को जन्म दिया। अब पद्मजा नायडू जूलॉजिकल हिमालयन पार्क में रेड पांडा की संख्या बढ़ कर 23 हो गयी है। इनमें से 13 मादा व 8 नर हैं। नये शावकों का लिंग अभी तय किया जाना बाकी है। 


गौरतलब है कि देश में दार्जिलिंग चिड़ियाखाना ही एकमात्र ऐसा चिड़ियांखाना है जहां पूरी सफलता से कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर यानी बन्दी प्रजनन केंद्र चल रहा है। यहां रेड पांडा स्नो लेपर्ड और तिब्बती भालू का उक्त प्रणाली से प्रजनन कराया जाता है। ज्ञात हो कि दार्जीलिंग के अलावा रेड पांडा दक्षिण पूर्व एशिया और रूस में ही देखने को मिलते हैं।

 

 

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