रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं ने किया राष्ट्रीय चेतना का सृजन

आज हिन्दी साहित्य के प्रख्यात विद्वानों में से एक राष्ट्रकवी रामधारी सिंह दिनकर जी की 110 वी जयंती है। रामधारी सिंह दिनकर जी की कविताएं किसी अनपढ़ किसान को भी उतनी ही पसंद आती, जितनी की उन पर रिसर्च करने वाले स्कॉलर्स को। इनकी कविताओं में वीर रस झलकता है। उन्होंने अपनी कविताओं से राष्ट्रीय चेतना का सृजन किया।


बिहार के बेगुसराय जिला अंतर्गत सिमरिया में जन्मे दिनकर जी की पहली रचना 'प्राणभंग' 1928 में प्रकाशित हुई। इसके बाद उन्होंने 'रेणुका', 'हुंकार', 'कुरुक्षेत्र', 'बापू', 'रश्मिरथी'  आदि कई रचनाएं लिखी। रामधारी सिंह दिनकर को एक ओजस्वी राष्ट्र भक्ति से ओतप्रोत कवि के रूप में पहचाना जाता था। उनकी रेणुका और हुंकार रचना में देश भावना इस कदर तेज़ थी कि अंग्रजों ने घबराकर के इनकी किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

रामधारी सिंह दिनकर हिंदी के ऐसे कवि हैं, जो अपने लिखे के लिए कभी विवादित नहीं रहे। वे ऐसे कवि हैं जो एक साथ पढ़े-लिखे, अनपढ़ और कम पढ़े-लिखों के बीच भी बहुत लोकप्रिय हुए।


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