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शारीरिक प्रतिबंधकता की उपेक्षा कर सुष्मिता ने दी माध्यमिक की परीक्षा

शारीरिक प्रतिबंधकता की उपेक्षा कर विधाननगर के मिलनपल्ली की निवासी सुष्मिता मंडल अपनी माध्यमिक की परीक्षा दे रही है। सुष्मिता विधाननगर के संतोषिनी विद्याचक्र की छात्रा है। सुष्मिता 90 प्रतिशत विकलांग है। उसके दांये हाथ की लंबाई भी अन्य लोगों से काफी कम है। बांये हाथ में भी सिर्फ दो अंगुलियां है, जिस वजह से वह उस हाथ से भी कुछ नहीं पकड़ पाती।

अब ऐसे में सुष्मिता का भरोसा बस उसके दो पैर ही हैं। अपने पैरों की सहायता से पढ़-लिख कर कुछ बनने का सपना है सुष्मिता का। मंगलवार को माध्यमिक के पहले दिन सुष्मिता ने अपना बांये पैर से परीक्षा में उत्तर लिखे।  

सुष्मिता के माता-पिता दोनों पेशे से मज़दूर हैं। इसी लिये आर्थिक तंगी के कारण वे लोग सुष्मिता का इलाज करा पाने में समर्थ नहीं हैं। इसके बावजूद बचपन से सुष्मिता अपने शरीर की परेशानियों को नज़र अंदाज़ कर पढ़ाई-लिखाई करती आ रही है। बाकी लोगों की तरह ही सुष्मिता भी अपनी ज़िंदगी को ले कई सपने देखती है। कल परीक्षा देने के बाद सुष्मिता ने कहा कि वह भविष्य में शिक्षिका बनना चाहती है।

 

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