विधवा विवाह के प्रबल समर्थक थे ईश्वरचन्द्र विद्यासागर

आज ईश्वरचन्द्र विद्यासागर की 200 वीं जन्म जयंती है। इन महान समाज सुधारक का जन्म 26 सितंबर 1880 ई. में पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले में हुआ था। ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने समाज की गंदी विचारधारा को खत्म करने का प्रयास किया था।


इन्होंने विधवा पुनर्विवाह एवं बाल विवाह जैसी कुरीतियों के लिये जो कार्य किये थे, वो स्मरणीय हैं। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह के लिये लोकमत तैयार किया। वे विधवा विवाह के प्रबल समर्थक थे। शास्त्रीय प्रमाणों से उन्होंने विधवा विवाह को वैध प्रमाणित किया। उन्होंने तत्कालीन सरकार के सामने एक याचिका देकर विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए कानून बनाने की मांग की। उन्होंने अपने इकलौते पुत्र का विवाह एक विधवा से ही किया। इन्हीं के प्रयासों से 1856 ई. में विधवा पुनर्विवाह कानुन पारित किया गया था।

ईश्वर चन्द्र बहुत विद्वान थे। इनके इस गुण के कारण संस्कृत कॉलेज ने उन्हें विद्यासागर की उपाधी प्रदान की थी। वह भारतीय उपमहाद्वीप से एक बंगाली बहुरूपी और बंगाल पुनर्जागरण के प्रमुख व्यक्ति थे। वे एक दार्शनिक, अकादमिक शिक्षक, लेखक, अनुवादक, मुद्रक, प्रकाशक, उद्यमी, सुधारक और परोपकारी व्यक्ति थे। बंगाली गद्य को सरल और आधुनिक बनाने के उनके प्रयास महत्वपूर्ण थे।


विद्यासागर के बचपन का नाम ईश्वर चंद्र बन्दोपाध्याय था। संस्कृत भाषा और दर्शन में ज्ञानी होने के चलते उन्हें विद्यार्थी जीवन में ही संस्कृत कॉलेज ने 'विद्यासागर' की उपाधि प्रदान की थी। विद्यासागर ने महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने में अहम योगदान दिया था। वे बाल विवाह के खिलाफ थे। 29 जुलाई, 1891 को इस महान समाज सुधार ने दुनिया से अलविदा कहा।

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