सिलीगुड़ी, 18 फरवरी: कुछ ही दिनों में दोल (होली) का त्योहार आने वाला है। बसंत के आगमन के साथ ही अबीर की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए शहर के अबीर निर्माताओं ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
सिलीगुड़ी के ईस्टर्न बाईपास के पास स्थित छोटा फापड़ी इलाके की एक अबीर फैक्ट्री में सुबह से देर रात तक काम जारी है। यहां मजदूर कोई रंगों को मिश्रित कर रहा है, तो कोई सूखे अबीर को चलनी से छान रहा है, वहीं कुछ कर्मचारी पैकेजिंग में व्यस्त है। फैक्ट्री प्रबंधन के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मांग काफी बढ़ी है, इसलिए पहले से ही उत्पादन बढ़ा दिया गया है।
फैक्ट्री के एक संचालक ने बताया, हम पूरी तरह हाथ से तैयार अबीर बनाते है। इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता है। प्राकृतिक और त्वचा के अनुकूल रंगों के इस्तेमाल के कारण हमारे अबीर की अलग पहचान और मांग है। यहां तैयार अबीर केवल सिलीगुड़ी या उत्तर बंगाल ही नहीं, बल्कि राज्य के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों में भी भेजा जाता है। वर्तमान समय में ग्राहकों में जागरूकता बढ़ी है। त्वचा को नुकसान, एलर्जी और पर्यावरण प्रदूषण की आशंका को देखते हुए लोग अब केमिकल मुक्त और पर्यावरण अनुकूल अबीर को प्राथमिकता दे रहे है। यही कारण है कि बाजार में हाथ से बने सुरक्षित अबीर की मांग लगातार बढ़ रही है।
