जानकारी के अनुसार, इस आईसीडीएस केंद्र का निर्माण वर्ष 1996 में हुआ था। समय के साथ भवन की हालत खराब होती चली गई। पिलर कमजोर हो चुके हैं और किसी भी समय छत या भवन का हिस्सा गिरने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस खतरनाक भवन में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।
कांतिपाड़ा, मयनाडांगी और मानतापाड़ा गांवों के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और विकास के लिए यह केंद्र महत्वपूर्ण है। लेकिन पिछले कई वर्षों से यहां कोई स्थायी शिक्षिका नहीं है। फिलहाल केंद्र में बच्चों को केवल पका हुआ भोजन देकर सेवाएं जारी रखी जा रही हैं।
केंद्र की कर्मी सुनीति राय ने बताया कि बच्चों के लिए भोजन तैयार करने के साथ गर्भवती महिलाओं और माताओं को भी सेवाएं देनी पड़ती हैं। बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभालने वाला कोई नहीं है। पहले गायत्री सिंह नाम की एक कर्मचारी थी, लेकिन बाद में उनका तबादला दूसरी जगह हो गया।
इस संबंध में स्थानीय पंचायत और प्रधान से संपर्क करने पर उन्होंने जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया है।




