सिलीगुड़ी, माटीगाड़ा(नि.सं.)। माटीगाड़ा 2 नंबर ग्राम पंचायत अंतर्गत लगभग 70 कट्ठा डीआई फंड की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस जमीन पर दो पक्षों द्वारा मालिकाना हक का दावा किए जाने से मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। डीआई फंड की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए अमृत थापा ने दार्जिलिंग के जिलाधिकारी मनीष मिश्रा से लिखित शिकायत की है। शिकायत मिलने के बाद डीएम ने मामले की जांच के निर्देश एसडीओ को दे दिए हैं।
अमृत थापा का दावा है कि उनके पूर्वज आजादी से पहले से ही माटीगाड़ा स्थित डीआई फंड की जमीन पर रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि जमीन को लीज पर लेने के लिए वर्ष 1987 और 2007 में जिलाधिकारी से आवेदन भी किया गया था, जिसके दस्तावेज उनके पास मौजूद है। अमृत थापा ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मिलकर रातों-रात उनकी दुकान को तोड़ दिया और जमीन पर चारदीवारी खड़ी कर दी, जो पूरी तरह अवैध है। इस संबंध में उन्होंने माटीगाड़ा थाने में करीब छह लोगों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है और कुछ लोगों को भूमाफिया बताया है।
वहीं, इस मामले में दूसरा पक्ष विक्रम थापा सामने आया है। उन्होंने अमृत थापा द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। विक्रम थापा का कहना है कि डीआई फंड की जमीन उन्हें सरकारी नियमों के तहत लीज पर दी गई है, जिसके वैध दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1982 में कोर्ट के माध्यम से उन्हें यह जमीन लीज पर मिली थी।
विक्रम थापा ने आरोप लगाया कि अमृत थापा के पास लीज से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं और वे झूठी अफवाह फैलाकर जमीन हथियाने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने यह भी कहा कि भूमाफिया जैसे आरोपों को लेकर वे अमृत थापा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
आज माटीगाड़ा में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान अमृत थापा ने जिलाधिकारी मनीष मिश्रा को अपनी शिकायत सौंपी। शिकायत सुनने के बाद डीएम ने कहा कि मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी और इसके लिए एसडीओ को जांच का निर्देश दिया गया है। डीआई फंड की इस सरकारी जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जमीन किसे वैध रूप से लीज पर दी गई है और किसका दावा सही है, इसका खुलासा एसडीओ की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
