सिलीगुड़ी, 13 जनवरी (नि.सं.)। पौष संक्रांति का नाम आते ही हर घर में पीठे -पुली की खुशबू फैल जाती है। बंगाल में यह पर्व बिना पीठे के अधूरा माना जाता है। इसी वजह से पर्व से एक दिन पहले ही लोग बाजारों की ओर उमड़ पड़े हैं। पीठे बनाने के मुख्य सामग्री चावल के आटे की खरीदारी को लेकर सिलीगुड़ी के विभिन्न बाजारों में भारी भीड़ देखी जा रही है।
पहले पौष पर्व का मतलब था घर-घर उत्सव की तैयारी। अपने हाथों से चावल पीसकर भापा पीठा, पाटिसापटा, दूध पुली जैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते थे। लेकिन समय के साथ यह परंपरा काफी हद तक बदल गई है। व्यस्त जीवनशैली के कारण अब बहुत से लोगों के पास घर पर चावल पीसने का समय नहीं है, जिससे बाजार पर निर्भरता बढ़ गई है।
हाकिमपाड़ा, विधान मार्केट समेत सिलीगुड़ी के अलग-अलग इलाकों के बाजारों में इन दिनों चावल के आटे की अस्थायी दुकानें नजर आ रही है। महिलाएं और पुरुष, दोनों ही इस कारोबार से जुड़े है और बढ़ती भीड़ को संभालने में व्यस्त है।
विक्रेताओं का कहना है कि पौष पर्व के समय चावल के आटे की मांग सबसे ज्यादा रहती है। घर पर बनाने की परंपरा कम होने से बाजार में बने चावल के आटे की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। खासकर शहर के कामकाजी परिवार बाजार से तैयार चावल का आटा खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे है। इससे इन कुछ दिनों में उनकी आमदनी भी अच्छी हो रही है।
