सिलीगुड़ी में आगामी 26 फरवरी से शुरू होगा तीन दिवसीय हिंदी नाट्य उत्सव

सिलीगुड़ी, 22 फरवरी (नि.सं.)।पश्चिम बंग हिंदी अकादमी द्वारा 26 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तीन दिवसीय 'प्रथम राष्ट्रीय हिंदी नाट्य उत्सव - 2021' का आयोजन किया जा रहा है। अकादमी के अध्यक्ष श्री विवेक गुप्ता के नेतृत्व में नाट्य उत्सव का प्रयास सिलीगुड़ी के नगर वासियों के लिए ऐतिहासिक पहल की तरह है।


26 फरवरी को पटना के निर्माण कला मंच की ओर से संजय उपाध्याय के निर्देशन में भिखारी ठाकुर द्वारा रचित नाटक 'विदेसिया' खेला जाएगा। 27 फरवरी को दिल्ली के पीपुल्स थिएटर द्वारा निलॉय राय के निर्देशन में भीष्म साहनी के नाटक हानूश और 28 फरवरी को कोलकाता की लिटिल थेस्पियनाट्य संस्था द्वारा एस एम अजहर आलम के निर्देशन में भीष्म साहनी का नाटक 'कबीरा खड़ा बाजार में' खेला जाएगा। इस अवसर पर अतिथि के रूप में उत्तर पूर्वांचल से प्रकाशित एकमात्र वैचारिक मासिक पत्रिका आपका तिस्ता-हिमालय के संपादक डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह एवं सिलीगुड़ी के दमामा नाट्य संस्था के वरिष्ठ रंग निर्देशक श्री पार्थ चौधरी उपस्थित रहेंगे। साथ ही सिलीगुड़ी के शिक्षक साहित्यकार डॉक्टर मुन्नालाल प्रसाद को उनके नाट्य जगत में योगदान के लिए रंग सम्मान से सम्मानित भी किया जाएगा।

अकादमी के कला संकाय की संयोजक उमा झुनझुनवाला के नेतृत्व में यह नाट्य उत्सव संचालित है। उमा झुनझुनवाला ने संवाददाता को संबोधित करते हुए कहा कि मानव संस्कृति जहां एक और मनुष्य के जीवन संघर्ष से जुड़ी हुई है, वहीं दूसरी और उसकी क्रीडा और मनोरंजन की जरूरत और प्रवृत्ति से इसीलिए संस्कृति एक और मनुष्य के सृजनात्मक सामर्थ्य तथा उसके आध्यात्मिक वैभव का मानदंड है, वहीं दूसरी ओर उसकी क्रीड़ा और मनोरंजन की प्रवृत्ति की भी एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है। रंगमंच नाट्य रस, भाव, कर्म और क्रियाओं के अभिनय द्वारा लोक के सामाजिक पक्ष को व्यक्त करते हुए सब को उपदेश देने वाला है। नाटक का संबंध शुद्ध साहित्य से होता है अर्थात् नाटक हकीकी जिंदगी का साहित्यिक आख्यान है। नाटकों के द्वारा दर्शकों की मानसिक रूचि का परिष्कार कर उन्हें परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जागरूक बनाना ही हमारा आंदोलन है। अकादमी के कला संकाय के सह संयोजक दिलीप दूगड़ ने बताया के पश्चिम बंग हिंदी अकादमी के द्वारा यह नाट्य उत्सव नाट्य जगत के प्रति सिलीगुड़ी वासियों में पर्याप्त रूचि पैदा करेगा और हिंदी साहित्य की एक विधा को सिलीगुड़ी में बहुप्रतीक्षित स्थान उपलब्ध होगा।


अकादमी के सदस्य प्रोफेसर डॉ अजय कुमार साव ने नाटकों का परिचय दिया। उन्होंने कहा जहां विदेसिया नाटक पारिवारिक पीड़ा की मार्मिक अभिव्यक्ति है, वही भीष्म साहनी का नाटक 'कबीरा खड़ा बाजार में' वर्तमान विसंगतियों का जीवंत दस्तावेज है। कबीर जिस बाजार में खड़े हैं, वह क्रय-विक्रय का स्थल मात्र नहीं है, बल्कि ऐसा बाजार है, जो सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों को भी संचालित करता है। एक ओर धर्म के ठेकेदार हैं, तो दूसरी ओर आम इंसान। कबीर के द्वारा किया गया प्रतिरोध वर्तमान समय की मांग है। आज धर्म और राजनीति ने जिस तरह से बाजार को अपनी सफलता का माध्यम बना लिया है और प्रतिरोध की संस्कृति को ही दफना दिया है, उस बाजार के चेहरे को सही ढंग से पहचानने की जरूरत है।

अकादमी के सदस्य डॉ मो मजीद मियां ने भीष्म साहनी द्वारा रचित नाटक 'हानूश' का परिचय देते हुए कहा कि नाटक एक कलाकार की अपनी कला और जीविका उपार्जन को लेकर मानसिक एवं आर्थिक द्वंद की दास्तान है। इस नाटक में सत्ता, राजनीति एवं धर्म के गठबंधन और सामाजिक शक्तियों के संघर्ष को बहुत ही प्रभावशाली तरीके से अभिव्यक्त किया गया है। इस संघर्ष का कारण व्यापारी वर्ग का उदय, सत्ता में उसकी भागीदारी और व्यापारी वर्ग द्वारा सत्ता और धर्म के गठबंधन को कमजोर करने का प्रयास है। इस अवसर पर अकादमी के सदस्य डॉ ओम प्रकाश पांडे भी उपस्थित थे।

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