सिलीगुड़ी के विश्वबंगला शिल्पीहाट में हस्तशिल्प मेले की धूम, 9 दिनों में करीब 2 करोड़ का कारोबार

सिलीगुड़ी, 10 जनवरी(नि.सं.)। सिलीगुड़ी के कावाखाली स्थित विश्वबंगला शिल्पीहाट में आयोजित हस्तशिल्प मेला इन दिनों पूरी तरह से रौनक से भरा हुआ है। मेले में रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। मेला शुरू होने के बाद मात्र 9 दिनों में ही लगभग 2 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है।


मेले में कारीगरों के हाथों से बने विविध हस्तशिल्प सामग्रियां लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। मिट्टी, बांस और लकड़ी से बने उत्पादों की भरपूर श्रृंखला लेकर शिल्पी यहां पहुंचे है। इस वर्ष विशेष रूप से दक्षिण दिनाजपुर जिले के कुशमंडी के शिल्पी योगेश देवशर्मा सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

योगेश देवशर्मा ने जूट (पाट) से बने अनोखे उत्पाद पेश किए है। आमतौर पर जूट से बने बैग, जूते या घर सजाने की वस्तुएं लोगों के लिए परिचित है, लेकिन योगेश देवशर्मा   ने जूट से पूरी तरह से अलग और नवीन प्रकार के परिधान तैयार किए है। इनमें फुल जैकेट, नेहरू जैकेट, ट्राउजर और टोपी शामिल है।


कृषि कार्य से जुड़े योगेश देवशर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने शौक और रुचि से यह काम सीखना शुरू किया। पहले उन्होंने जूट की टोपी और दस्ताने बनाना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे फुल जैकेट, नेहरू जैकेट और ट्राउजर बनाकर लोगों की सराहना हासिल की।

योगेश देवशर्मा खुद कच्चे जूट से धागा तैयार करते है। धागे को रंगने से लेकर क्रोशिया (कुरुश कांटा) की मदद से डिजाइन बनाने तक, पूरा काम वे अपने हाथों से करते है।

उन्होंने कहा कि यह उनका पहला अनुभव है जब वे विश्वबंगला शिल्पीहाट के मेले में आए है। यहां आकर उन्हें समझ में आया कि जूट से बने परिधानों की अच्छी मांग है। लोग इन उत्पादों को देखकर हैरान भी हो रहे है। हालांकि जूट से बने कपड़ों की कीमत थोड़ी अधिक होने के कारण कई लोग चाहकर भी इन्हें खरीद नहीं पा रहे है, लेकिन लोगों की दिलचस्पी और सराहना ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है। भविष्य में वे और अधिक मेलों में भाग लेकर अपने जूट से बने परिधानों को लोगों तक पहुंचाना चाहते है।

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