सिलीगुड़ी: आधुनिक दौर में भी जिंदा है हाथ से बने ऊनी कपड़ों की परंपरा, सपनों को बुन रही हैं पॉपी राय

सिलीगुड़ी:जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा है, शीत ऋतु आते ही बचपन के हाथ से बुने ऊनी कपड़ों की याद ताजा हो जाती है। आधुनिकता की रफ्तार में आज भले ही हाथ से बने ऊनी वस्त्र और सामान धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हों, लेकिन उसी लुप्त होती कला को संजोकर अपने सपनों को साकार कर रही हैं एक युवती।


एकटियाशाल के खुदीराम पल्ली इलाके की रहने वाली और हाल ही में कॉलेज पास करने वाली पॉपी राय अपने हुनर के दम पर अलग पहचान बना रही हैं। आत्मविश्वास के साथ वह लगातार तरह-तरह के ऊनी सामान तैयार कर रही है। पॉपी राय स्वेटर, जैकेट, मफलर के साथ-साथ ऊन से बने तकिए और खूबसूरत फूलों के गुलदस्ते भी तैयार करती हैं। खास बात यह है कि वह ये सभी सामान बेहद कम कीमत पर बेचती हैं।
पॉपी राय बताती हैं कि उन्होंने इस काम की शुरुआती सीख अपनी मां से ली थी। इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए नए-नए डिजाइन और तकनीकें सीखी। उनका कहना है कि सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जाती है, अगर इस तरह के पारंपरिक कामों के लिए विशेष पहल की जाए तो और भी लोग इससे जुड़ सकते है।
पॉपी राय यह भी कहती हैं कि अगर कोई इस काम को सीखना चाहता है तो वह खुद हाथों-हाथ प्रशिक्षण देने के लिए तैयार है। उनके अनुसार, जो लोग दिनभर घर पर रहते हैं या बेवजह मोबाइल फोन पर समय गंवाते है, वे यदि यह काम सीख लें तो आत्मनिर्भर बन सकते है।
पॉपी के मुताबिक, भले ही सर्दियों के 4–5 महीनों में ऊनी सामानों की मांग सबसे ज्यादा रहती है, लेकिन सालभर किसी न किसी रूप में इस काम की मांग बनी रहती है।


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