राजगंज ब्लॉक की माझियाली ग्राम पंचायत के पाथरघाटा गांव में शीतल सरकार ने अपने घर पर ही मोमबत्ती बनाने की छोटी फैक्ट्री स्थापित की है। वह पिछले 10-12 वर्षों से इस काम से जुड़े हैं। काली पूजा से पहले उनकी फैक्ट्री में उत्पादन तेज हो गया है। यहां छोटी, बड़ी और मध्यम आकार की मोमबत्तियों के साथ स्टैंड वाली मोमबत्तियां भी बनाई जा रही हैं। तीन से चार कर्मचारी उनके साथ काम कर रहे हैं।
शीतल सरकार के मुताबिक, कच्चे माल की कीमत बढ़ने के कारण इस साल मोमबत्तियों की कुल मांग और बिक्री में कुछ कमी आई है। इसके बावजूद काली पूजा के दौरान मांग अपेक्षाकृत अधिक रहती है। खासकर गेरुआ रंग की मोमबत्तियों की मांग बढ़ने के कारण इनके उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उनकी फैक्ट्री में एक रुपये से लेकर 25 रुपये तक की मोमबत्तियां तैयार होती हैं। सालभर दो और पांच रुपये वाली मोमबत्तियों की मांग बनी रहती है, जबकि काली पूजा के दौरान रंगीन मोमबत्तियों की बिक्री बढ़ जाती है। यहां तैयार मोमबत्तियां सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी और हल्दीबाड़ी समेत आसपास के विभिन्न इलाकों में भेजी जाती हैं।
हालांकि, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और बिजली की सजावट से मिल रही प्रतिस्पर्धा के बीच कारोबार चलाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके बावजूद काली पूजा और दीपावली से पहले गेरुआ मोमबत्तियों की बढ़ती मांग ने पाथरघाटा के इस कारीगर की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।




