नक्सलबाड़ी, 3 जनवरी (नि.सं.)। SIR सुनवाई का नोटिस एक विशेष रूप से दिव्यांग मतदाता को भेजे जाने को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।नक्सलबाड़ी बीडीओ कार्यालय में आयोजित सुनवाई में विशेष रूप से दिव्यांग तीर्थ बहादुर राय उपस्थित हुए। जन्म से ही दिव्यांग तीर्थ बहादुर राय बागडोगरा के सुकांतपल्ली के निवासी हैं और वे 60 प्रतिशत शारीरिक रूप से अक्षम हैं। उन्हें राज्य सरकार की मानविक (दिव्यांग) पेंशन भी मिलती है।परिजनों के अनुसार वर्ष 2002 में परिवार के किसी भी सदस्य का नाम मतदाता सूची में दर्ज न होने के कारण उन्हें इस सुनवाई में आना पड़ा। सुनवाई में शामिल होने के लिए तीर्थ बहादुर राय अपने बड़े भाई और पत्नी के साथ करीब 9 किलोमीटर दूर से वाहन किराए पर लेकर बीडीओ कार्यालय पहुंचे। तीर्थ को बोलने में भी काफी कठिनाई होती है।इस संबंध में तीर्थ बहादुर के भाई सुषे राय ने कहा कि यदि घर जाकर ही यह प्रक्रिया पूरी की जाती, तो उनके लिए काफी सुविधा होती। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों एक विशेष रूप से दिव्यांग मतदाता को कार्यालय बुलाकर सुनवाई के लिए बाध्य किया गया।
