नक्सलबाड़ी, 16 जनवरी(नि.सं.)। नाम मतदाता सूची से कट जाने के डर ने नक्सलबाड़ी में एक बार फिर प्रशासनिक प्रक्रिया की जमीनी हकीकत सामने ला दी है। SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) सुनवाई के लिए नक्सलबाड़ी बीडीओ कार्यालय के बाहर लाठी के सहारे खड़े बुजुर्ग दंपति की तस्वीर ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
स्टेशन पाड़ा निवासी सबितलाल मिश्रा (79) और उनकी पत्नी माधुरी देवी मिश्रा (70) को इस उम्र और गंभीर बीमारियों के बावजूद सुनवाई में उपस्थित होना पड़ा। सबितलाल मिश्रा का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज है, फिर भी उन्हें सुनवाई का नोटिस मिला।
बुजुर्ग दंपति पहले से ही कई शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। सबितलाल मिश्रा को ठीक से सुनाई नहीं देता और आंखों से भी कम दिखाई देता है, जबकि माधुरी देवी मिश्रा अस्थमा की मरीज हैं। इसके बावजूद दोनों को बीडीओ कार्यालय आना पड़ा, जहां कथित तौर पर भारी अव्यवस्था और परेशानियों का सामना करना पड़ा।
माधुरी देवी मिश्रा ने बताया कि, हम पढ़े-लिखे नहीं हैं। 2002 से नाम होने के बावजूद नोटिस आया है। कहा जा रहा है कि जिनका नाम नहीं रहेगा, उन्हें बाहर कर दिया जाएगा। इसी डर से सुनवाई में आए हैं। इस घटना ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के दौरान आम लोगों, खासकर बुजुर्गों को हो रही परेशानियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
