भेलकीपाड़ा की कई महिलाएं घर बैठे ही माला बनाने का काम करती हैं। वे सिलीगुड़ी की फूलों की फैक्ट्रियों से माला बनाने की सामग्री लाती हैं, घर पर मालाएं तैयार करती हैं और फिर उन्हें वापस जमा कर देती हैं। दुर्गा पूजा, काली पूजा और सरस्वती पूजा समेत विभिन्न त्योहारों के लिए अलग-अलग तरह की मालाएं बनाई जाती हैं। फिलहाल महिलाएं काली पूजा के मद्देनजर खास तौर पर जाभा फूलों वाली मालाएं तैयार कर रही हैं।
स्थानीय निवासी संयुक्ति बर्मन पिछले करीब चार वर्षों से इस काम से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि एक दिन में कितनी मालाएं बनाई जा सकती हैं। पूजा के मौसम में इस काम से करीब तीन से पांच हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है, जिससे त्योहार के दौरान घर का खर्च संभालने में मदद मिलती है। उनके साथ इलाके की 10 से 12 अन्य महिलाएं भी इस काम में जुड़ी हुई हैं।
वहीं, मौमिता सिंह बर्मन पिछले दो-तीन वर्षों से माला बनाने का काम कर रही हैं। घर के कामकाज निपटाने के बाद वह खाली समय में मालाएं बनाती हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में काम और कमाई कम रहती है, लेकिन पूजा के मौसम में मांग बढ़ जाती है। काली पूजा से पहले जाभा फूलों वाली मालाओं का काम तेजी से चल रहा है। इस दौरान उन्हें करीब दो से तीन हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है।




