सिलीगुड़ी, 31 जनवरी (नि.सं.)। सिलीगुड़ी नगर निगम ने आस्था और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक सराहनीय पहल की है। पूजा-पाठ के बाद शहर के विभिन्न चौक-चौराहों, नालों और पेड़ों के नीचे रखी देवी-देवताओं की मूर्तियों को नगर निगम की ओर से एकत्रित कर विधि-सम्मत तरीके से नदी में विसर्जित किया गया।
नगर निगम के मेयर परिषद सदस्य मानिक दे की पहल पर यह अभियान शुरू किया गया है, जिसे समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक नई सोच माना जा रहा है। खासतौर पर सरस्वती पूजा के बाद शहर के कई इलाकों में मां सरस्वती की मूर्तियों को विसर्जन के बजाय सड़क किनारे या खुले स्थानों पर छोड़ देने की प्रवृत्ति देखी जाती है, जिससे आस्था को ठेस पहुंचती है।
समाज के कुछ वर्गों में यह धारणा प्रचलित है कि मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन करने से विद्या का भी विसर्जन हो जाता है, इसी वजह से पूजा के बाद मूर्तियों को विसर्जित नहीं किया जाता। लेकिन पूजा के बाद प्रतिमाओं को खुले स्थानों पर छोड़ देना, जहां गंदगी और पशु-पक्षियों का आवागमन होता है, आस्था के विपरीत माना जाता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सिलीगुड़ी नगर निगम के कचरा विभाग के मेयर परिषद मानिक दे के नेतृत्व में निगम की टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में घूम-घूम कर मां सरस्वती सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को एकत्र किया और पूरे सम्मान के साथ उनका विसर्जन कराया।
इस अवसर पर मानिक दे ने कहा कि पूजा के बाद नियम और श्रद्धा के साथ मूर्तियों का विसर्जन करना ही उचित है। खुले में मूर्तियां छोड़ना न केवल आस्था को ठेस पहुंचाता है बल्कि शहर में प्रदूषण भी बढ़ाता है। इसी उद्देश्य से नगर निगम ने यह अभियान शुरू किया है, ताकि आस्था भी बनी रहे और शहर भी स्वच्छ रहे।
