गाजोलडोबा के 12 नंबर इलाके में स्थानीय लोगों की मौजूदगी में सिलीगुड़ी की एक स्वयंसेवी एवं पर्यावरण प्रेमी संस्था की ओर से सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान पांचों मछुआरों को प्रशस्ति पत्र और सम्मान देकर सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने पर पांचों मछुआरे भावुक हो उठे।
कार्यक्रम में बेलाकोबा रेंज के रेंजर समीरन राज, आपालचांद रेंज के रेंज ऑफिसर नवांकुर घोष, समाजसेवी मनोज बर्मा, पर्यावरणप्रेमी संस्था के द्वीपज्योति चक्रवर्ती, अचिंत्य गुप्त और तरुण राय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
उद्धारकर्ता मछुआरे अजय दास ने बताया कि तीस्ता के गेट के नीचे से हाथी के एक बच्चे के बह जाने की खबर मिलते ही वे लोग नाव लेकर नदी में निकल पड़े थे। तेज बहाव के कारण हाथी का बच्चा बार-बार पानी में डूब रहा था। करीब चार किलोमीटर दूर जाकर उसकी तलाश पूरी हुई। इसके बाद पांचों मछुआरे नाव से उसके पास पहुंचे और उसे सुरक्षित बाहर निकालकर वन विभाग को सौंप दिया।
एक अन्य मछुआरे विश्वनाथ दास ने बताया कि पानी में हाथी का बच्चा बार-बार डूब रहा था और फिर सतह पर आ रहा था। काफी देर तक तलाश करने के बाद उसे देखा गया। इसके बाद उसे गोद में उठाकर वन विभाग के कर्मचारियों को सौंप दिया गया।
रेंज ऑफिसर नवांकुर घोष ने बताया कि मछुआरों की त्वरित कार्रवाई के कारण हाथी के बच्चे की जान बच सकी है। बाद में वनकर्मियों ने बच्चे को सुरक्षित निकालकर उसकी मां से मिला दिया। फिलहाल मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और जंगल में लौट चुके हैं।
वहीं, समाजसेवी मनोज बर्मा और पर्यावरणप्रेमी संस्था के द्वीपज्योति चक्रवर्ती ने कहा कि अपनी जान जोखिम में डालकर मछुआरों ने जिस तरह हाथी के बच्चे को बचाया, वह बेहद सराहनीय है। उनके साहस को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह सम्मान समारोह आयोजित किया गया।





