सिलीगुड़ी, 27 फरवरी(नि.सं)। रंगों के त्योहार डोल और होली से पहले हर्बल अबीर (गुलाल) की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए वन विभाग के नॉन-टिंबर फॉरेस्ट प्रोड्यूस (NTFP) विभाग ने इस वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर उत्पादन किया है।
सिलीगुड़ी के समीप बागडोगरा स्थित वन विभाग की इकाई में इस वर्ष गेंदा फूल, बेलपत्र और मुल्तानी मिट्टी से तीन प्रकार के हर्बल अबीर तैयार किए गए हैं। ये अबीर नारंगी, पीले और हरे रंग में बाजार में उपलब्ध है।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2024 में कुल 3.9 क्विंटल अबीर का उत्पादन हुआ था, जिससे लगभग 46 हजार रुपये की आय हुई थी। इस वर्ष उत्पादन बढ़कर करीब साढ़े पांच क्विंटल तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। विभाग ने इस बार कम से कम एक लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा है।
हर्बल अबीर की बिक्री वन विभाग के विभिन्न काउंटरों पर शुरू हो चुकी है। सिलीगुड़ी के अलावा जलपाईगुड़ी और बीरपाड़ा में भी यह उपलब्ध है। आम लोगों को ध्यान में रखते हुए इसकी कीमत भी किफायती रखी गई है। 500 ग्राम के पैकेट की कीमत 90 रुपये और 250 ग्राम के पैकेट की कीमत 50 रुपये निर्धारित की गई है।
इस संबंध में डीएफओ मंजुला तिर्की ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई है। तीन प्रकार के हर्बल अबीर बाजार में उपलब्ध हैं और विभिन्न जिलों में इसकी अच्छी मांग देखी जा रही है।
