मामला अगस्त 2024 का है। आरोप है कि हिमाचल प्रदेश में काम करने के दौरान सुनील उरांव ने एक परिचित महिला की 6 वर्षीय बेटी को बेहतर भविष्य और शिक्षा दिलाने का भरोसा देकर खोरीबाड़ी स्थित अपने घर ले आया था। 29 सितंबर की रात आरोपी की पत्नी लक्खी उरांव ने कथित तौर पर उसे बच्ची के साथ दुष्कर्म करते हुए देखा। इसके बाद 30 सितंबर को उसने खोरीबाड़ी थाने में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत सुनील उरांव को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान करीब 16 लोगों की गवाही दर्ज की गई। लगभग दो वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
सिलीगुड़ी अदालत की पॉक्सो कोर्ट की पीपी सुनंदा सरकार ने बताया कि बेहतर भविष्य का झांसा देकर आरोपी बच्ची को हिमाचल प्रदेश से खोरीबाड़ी लाया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद आरोपी की पत्नी ने स्थानीय एनजीओ और पुलिस से संपर्क किया था। उन्होंने कहा कि अदालत का यह फैसला महत्वपूर्ण है।





