आने वाले दिनों में एक के बाद एक कई त्योहार हैं। पहले गणेश पूजा, फिर विश्वकर्मा पूजा और उसके बाद बंगाल का सबसे बड़ा उत्सव दुर्गापूजा। समय कम होने के कारण मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कोई अंतिम चरण में गणेश प्रतिमा को तैयार करने में जुटा है, तो कोई विश्वकर्मा की मूर्ति बनाने में व्यस्त है। कुम्हारटोली में अलग-अलग आकार और आकर्षक डिजाइन वाली गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।
हालांकि व्यस्तता के बावजूद मूर्तिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। कच्चे माल की कीमत बढ़ने से प्रतिमाएं तैयार करने की लागत काफी बढ़ गई है। लेकिन बढ़ी हुई लागत के अनुरूप प्रतिमाओं की कीमत बढ़ाना आसान नहीं है। अधिक कीमत मांगने पर ग्राहकों की संख्या कम होने का डर भी बना हुआ है।
ऐसी स्थिति में कई मूर्तिकार अब ऑर्डर के अनुसार काम करने पर जोर दे रहे हैं। अधिकांश मूर्तिकार बिना ऑर्डर के अतिरिक्त प्रतिमाएं तैयार कर जोखिम नहीं लेना चाहते है। उनका कहना है कि इस बार सभी पूजा कमेटी को सरकारी सहायता मिलेगी या नहीं, इसे लेकर भी आशंका है। ऐसे में यदि पूजा का बजट कम होता है तो उसका असर प्रतिमाओं की खरीद पर भी पड़ सकता है।
इधर गणेश पूजा में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। हाथ में मौजूद ऑर्डर का काम जल्द पूरा करने के दबाव के बीच कुम्हारटोली में काम जोरों पर है। इसके बाद विश्वकर्मा पूजा और फिर दुर्गापूजा है, जिसके लिए पहले से ही कई ऑर्डर मिल चुके हैं। हालांकि अतिरिक्त प्रतिमाएं बनाने को लेकर इस बार मूर्तिकार काफी सतर्क हैं।
एक ओर कच्चे माल की बढ़ती कीमत और दूसरी ओर ग्राहकों के कम होने का डर—इन दोनों के बीच मूर्तिकार को काफी सोच-समझकर आगे बढ़ना पड़ रहा है। इसके बावजूद काम रुका नहीं है। फिलहाल कुम्हारटोली में व्यस्तता चरम पर है और मूर्तिकार त्योहारों को रंगों से सजाने के लिए पूरी तरह तैयारियों में जुटे हैं।





