संगठन का आरोप है कि फिलहाल साउंड सिस्टम के इस्तेमाल में 65 डेसिबल की सीमा को लेकर कारोबारियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने राजनीतिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों में भी समान नियम लागू करने की मांग की है।
संगठन के सदस्यों के अनुसार, उत्तर बंगाल में कई परिवार और कर्मचारी साउंड कारोबार पर निर्भर हैं। त्योहारों के मौसम में कार्यक्रमों की बुकिंग लेने के बाद निर्धारित समय बीतने पर प्रशासन की ओर से साउंड बंद करने का निर्देश दिया जाता है। वहीं, उसी दौरान कार्यक्रम आयोजकों की ओर से साउंड जारी रखने का दबाव बनाया जाता है। उनका आरोप है कि इस स्थिति में कारोबारी दोनों पक्षों के दबाव में फंस जाते हैं।
संगठन की ओर से बताया गया कि समस्या के समाधान और नियमों में स्पष्टता की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को लिखित रूप से भी अवगत कराया गया है। हालांकि, अभी तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आठ सूत्री मांगों पर जल्द कदम नहीं उठाया गया, तो महालया से पूरे उत्तर बंगाल में साउंड कारोबार पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। मांगें पूरी होने तक यह निर्णय जारी रखने की बात भी संगठन के सदस्यों ने कही है।





