मजदूरों का आरोप है कि बोनस दिए बिना ही प्रबंधन ने अचानक कारखाना बंद कर दिया। दुर्गा पूजा की छुट्टियां खत्म होने के बाद जब वे काम पर पहुंचे, तो उन्हें गेट पर ताला और लॉकआउट का नोटिस मिला।
कारखाने के कर्मचारी निलय देवनाथ ने आरोप लगाया कि पूजा से पहले प्रबंधन और श्रमिक संगठन के बीच हुई बातचीत में स्थायी श्रमिकों को 10 हजार रुपये और अस्थायी श्रमिकों को 5 हजार रुपये अंतरिम राशि देने पर सहमति बनी थी। पूजा के बाद बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने की बात कही गई थी, लेकिन उससे पहले ही रातोंरात कारखाना बंद कर दिया गया।
निलय देवनाथ के अनुसार, कारखाने में 33 स्थायी मजदूर, 2 स्थायी कर्मचारी और 15 अस्थायी मजदूर काम करते हैं। अचानक कारखाना बंद होने से उनके सामने परिवार का खर्च चलाने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की चिंता पैदा हो गई है। मजदूरों का यह भी आरोप है कि कारखाने में न तो कोई प्रबंधन का अधिकारी मौजूद है और न ही सुरक्षा गार्ड।
इस बीच, तराई डुआर्स प्लांटेशन वर्कर्स एंड एम्प्लॉइज (सब-स्टाफ एंड स्टाफ) यूनियन के अध्यक्ष तपन दे ने आज जलपाईगुड़ी के उप श्रम आयुक्त को लिखित आवेदन सौंपा है। संगठन का आरोप है कि मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत होने से पहले ही लॉकआउट घोषित कर दिया गया। यूनियन ने मामले में जल्द प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।
कंपनी की ओर से जारी लॉकआउट नोटिस में आर्थिक संकट का हवाला देते हुए 18 अक्टूबर से कारखाना बंद रखने की बात कही गई है। कारखाने के गेट पर ताला लगा होने और प्रबंधन का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं होने के कारण उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क नहीं हो सका है।





