सिलीगुड़ी, 5 नवंबर (नि.सं.)। स्कूल के दरवाजे बंद हैं, न घंटी बज रही है और न ही कक्षाएं शुरू होने की कोई जल्दबाजी है। चारों ओर त्योहारों की रौनक है और बच्चे लंबी छुट्टियों का आनंद ले रहे हैं। लेकिन सिलीगुड़ी के दक्षिण शांतिनगर में एक शिक्षक ऐसे भी हैं, जो बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पूजा की छुट्टियों में भी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। दक्षिण शांतिनगर हिंदी प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक चित्तरंजन सरकार ने अपनी पहल पर स्कूल की छुट्टियों के दौरान विशेष कक्षाएं शुरू की हैं। खास बात यह है कि वह बिना किसी सरकारी निर्देश और अतिरिक्त पारिश्रमिक की अपेक्षा के पूरी तरह निःशुल्क बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
दरअसल, इस स्कूल में अधिकांश विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। कई बच्चों के घरों में पढ़ाई के लिए उचित माहौल या उन्हें नियमित रूप से पढ़ाने वाला कोई नहीं है। ऐसे में स्कूल ही उनके लिए शिक्षा का सबसे बड़ा सहारा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए चित्तरंजन सरकार ने दशमी के अगले दिन से विशेष कक्षाएं शुरू की है। इसमें उनके अपने स्कूल के विद्यार्थियों के साथ-साथ पास के हिंदी जूनियर हाई स्कूल के बच्चे भी शामिल हो रहे हैं।
सप्ताह में छह दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक स्कूल के खुले बरामदे में कक्षाएं चलती हैं। बच्चे बैग और किताब-कॉपियां लेकर पहुंचते हैं। प्रधान शिक्षक स्वयं बच्चों की जरूरत के अनुसार प्रश्नपत्र तैयार करते हैं और उनकी फोटोकॉपी कराकर विद्यार्थियों को देते हैं। खास तौर पर गणित और अंग्रेजी पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। आगामी वार्षिक परीक्षा को देखते हुए बच्चों की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें नियमित अभ्यास कराया जा रहा है।
इस पहल की खास बात केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। चित्तरंजन सरकार अपनी जेब से कक्षा में आने वाले बच्चों के लिए टिफिन का भी इंतजाम कर रहे हैं। कभी केक-बिस्कुट, कभी मिठाई तो कभी ब्रेड बच्चों को दिया जाता है। दरअसल, इलाके के कई गरीब परिवारों के बच्चों के लिए स्कूल का मिड-डे मील भी पोषण का एक महत्वपूर्ण सहारा है। लंबी छुट्टियों के कारण स्कूल बंद होने से उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में शिक्षक पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के भोजन का भी ध्यान रख रहे हैं।
प्रधान शिक्षक चित्तरंजन सरकार ने बताया कि स्कूल खुलते ही वार्षिक परीक्षा शुरू हो जाएगी। लंबे समय तक पढ़ाई से दूर रहने पर बच्चे कई चीजें भूल सकते हैं। इसी वजह से छुट्टियों के दौरान भी उनका पढ़ाई से जुड़ाव बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। गणित और अंग्रेजी पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि सभी विद्यार्थी परीक्षा के लिए बेहतर तैयारी कर सकें। पूरी तरह व्यक्तिगत पहल पर चल रही यह विशेष पाठशाला शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना की भी मिसाल पेश कर रही है।




