सिलीगुड़ी पोस्टर विवाद: बीजेपी उम्मीदवार शंकर घोष पर केस, जांच शुरू

सिलीगुड़ी, 8 अप्रैल (नि.सं.)। सिलीगुड़ी में चुनावी माहौल के बीच पोस्टर विवाद अब कानूनी रूप ले चुका है। भाजपा उम्मीदवार शंकर घोष और उनके समर्थकों के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है, जिससे शहर की राजनीति गरमा गई है।
पानीटंकी चौकी के ओसी निर्मल कुमार दास की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई। आरोप है कि 5 अप्रैल की रात गौतम देव के पोस्टर और झंडों को फाड़कर विकृत किया गया। इस मामले में पहले जनरल डायरी दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।


6 अप्रैल को जब पुलिस जांच के लिए मौके पर पहुंची, तो हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। पुलिस का दावा है कि शंकर घोष के नेतृत्व में 20-25 समर्थक मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का विरोध करने लगे। इस दौरान पुलिस और भाजपा समर्थकों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक हुई।

ओसी की शिकायत के मुताबिक, भाजपा समर्थकों ने न सिर्फ सरकारी काम में बाधा डाली, बल्कि ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार और धमकी भी दी। आरोप यह भी है कि लौटते समय शंकर घोष ने एक पुलिस अधिकारी को धक्का दिया और रास्ता रोकने की कोशिश की। इसके बाद समर्थकों ने पानीटंकी आउट पोस्ट के सामने इकट्ठा होकर कुछ समय के लिए गेट भी जाम कर दिया।


पुलिस ने इस मामले में शंकर घोष समेत कई भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं (189(2), 126(2), 221, 231, 115(2), 351(2)) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इस पूरे मामले पर सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस के डीसीपी तन्मय सरकार ने बताया कि शिकायत दर्ज कर ली गई है और घटना के वीडियो फुटेज जुटाए जा रहे है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले शंकर घोष ने कहा, सिलीगुड़ी में एक के बाद एक आपराधिक घटना घट रही है। पुलिस उस अपराधियों को गिरफ्तार नहीं कर पा रही है। 
सिलीगुड़ी की लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ता जा रहा है। लेकिन गौतम देव के कहने के दो घंटे के अंदर पुलिस जांच पर उतर जाती है। पुलिस उनके खिलाफ झूठा एफआईआर दर्ज की है। 
वहीं, तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार गौतम देव ने इस घटना को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयोग और पुलिस को सख्त कानूनी कदम उठाने चाहिए।

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