सिलीगुड़ी, 26 मई (नि.सं.)। सिलीगुड़ी में आठ साल पुरानी शिक्षिका रीता सरकार की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मृतका के परिवार ने राज्य की नई सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कर इसे दोबारा खोलने की मांग की है।
परिवार का आरोप है कि 18 फरवरी 2017 को रीता सरकार का शव उनके घर में फंदे से लटका मिला था। घटना के बाद पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए इलाके के दो तृणमूल कांग्रेस से जुड़े युवा नेताओं—मिठून दास और सुबीर साहा—को जिम्मेदार ठहराया था।
सुसाइड नोट में रीता ने आरोप लगाया था कि स्कूल आने-जाने के दौरान दोनों युवक लगातार उनका पीछा करते, छेड़छाड़ करते और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। उन्होंने यह भी लिखा था कि राजनीतिक प्रभाव के कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। घटना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें जमानत मिल गई। फिलहाल मामला अदालत में लंबित है।
मृतका की मां का कहना है कि पिछले आठ वर्षों में उन्हें न्याय नहीं मिला। उनका आरोप है कि उस समय राजनीतिक दबाव के कारण जांच सही दिशा में नहीं हुई। अब नई सरकार से उन्हें निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद है।
परिवार ने संकेत दिया है कि वे जल्द ही अदालत में मामले को दोबारा खोलने की अर्जी देंगे। वहीं, स्थानीय स्तर पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने वर्षों बाद भी इस मामले का अंतिम निष्कर्ष क्यों नहीं निकल पाया।
इस बीच, भाजपा नेताओं ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। मामला एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।
