घोषपुकुर, 15 जुलाई (नि.सं.)। एक समय सिलीगुड़ी महकमा के घोषपुकुर की सड़कें तेंदुओं के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती थी। तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर हर साल कई तेंदुओं की मौत हो जाती थी। लेकिन वन विभाग के लगातार प्रयास और आम लोगों के सहयोग से अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। जनवरी 2025 में सड़क हादसे में तेंदुए की मौत हुई थी। जबकि पिछले एक साल में घोषपुकुर रेंज में सड़क हादसे में एक भी तेंदुए की मौत नहीं हुई है।
वन विभाग के अनुसार, ‘ब्रेक फॉर वाइल्डलाइफ’ जागरूकता अभियान, संवेदनशील इलाकों में सख्त निगरानी, ड्राइवरों को सतर्क करना और स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी से यह सफलता मिली है। पहले जहां हर साल 10-15 तेंदुए हादसों का शिकार होते थे, अब यह संख्या शून्य हो गई है।
सिर्फ मौतें कम ही नहीं हुईं, बल्कि तेंदुए के शावकों को बचाने में भी बड़ी सफलता मिली है। इस साल पांच अलग-अलग घटनाओं में कुल आठ शावकों को सुरक्षित उनकी मां के पास लौटाया गया।
