गाजोलडोबा, 19 अगस्त (नि.सं.)। मनसा पूजा के अवसर पर राजगंज के गाजोलडोबा में मंगलवार को तीस्ता नदी में अष्टनाग की बेड़ा विसर्जित की गई। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूजा को लेकर इलाके में उत्साह का माहौल है। पूजा के अवसर पर सात दिवसीय मेले का भी आयोजन किया गया है।
पूजा कमेटी के अनुसार, वर्ष 2000 में गाजोलडोबा के तीस्ता नदी के चर क्षेत्र में बाढ़ के बाद सांपों का काफी आतंक बढ़ गया था। सांप के काटने से दो लोगों की मौत भी हुई थी। उसी वर्ष स्थानीय एक पुजारी की सलाह पर क्षेत्रवासियों ने सामूहिक रूप से अष्टनाग की पूजा शुरू की और आठ प्रतीकात्मक कुंवारी कन्याओं को केले के तने से बनी बेड़ा पर बैठाकर तीस्ता नदी में प्रवाहित किया। तब से हर वर्ष मनसा पूजा के साथ अष्टनाग की बेड़ा प्रवाहित करने की परंपरा जारी है।
पूजा कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि सांपों के आतंक से मुक्ति की कामना को लेकर हर साल मनसा पूजा और अष्टनाग की बेड़ा विसर्जन की जाती है। पहले वर्ष स्थानीय लोगों ने अपने श्रम से एक छोटा लकड़ी का मंदिर बनाकर पूजा शुरू की थी। बाद में मंदिर का पक्का निर्माण कराया गया और अब यहां भव्य तरीके से पूजा का आयोजन किया जाता है। हर वर्ष पूजा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से गाजोलडोबा में उत्सव का माहौल बना हुआ है।
