सिलीगुड़ी, 5 जुलाई (नि.सं.)। उत्तर बंगाल के प्रमुख पर्यटन केंद्र मिरिक को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी योजना तैयार की है। मिरिक झील के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ पर्यटकों के लिए कई नए एडवेंचर और मनोरंजन आधारित बुनियादी ढांचे विकसित किए जाएंगे। पहले चरण में करीब 100 करोड़ रुपये की परियोजना के जरिए मिरिक के व्यापक विकास की योजना बनाई गई है।
राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने बताया कि इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। अब केंद्र सरकार से वित्तीय मंजूरी और फंड मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा। पहले चरण के बाद चरणबद्ध तरीके से और बड़े निवेश के जरिए मिरिक को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मिरिक लंबे समय से देश-विदेश के पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय पहाड़ी स्थल रहा है। मिरिक झील, हरियाली से घिरे पहाड़, खूबसूरत चाय बागान, संतरे के बागान और आसपास के शांत गांव पर्यटकों को खास तौर पर आकर्षित करते हैं। हर साल हजारों पर्यटक यहां घूमने आते हैं। इसी संभावनाओं को और विस्तार देने के लिए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है।
प्रस्तावित परियोजना के तहत मिरिक झील का सौंदर्यीकरण, आधुनिक पर्यटक सुविधाएं, एडवेंचर स्पोर्ट्स, नेचर ट्रेल, व्यू प्वाइंट का विकास, मनोरंजन गतिविधियां और नए आकर्षण तैयार किए जाएंगे। इससे न केवल पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा, बल्कि स्थानीय व्यवसाय, होटल उद्योग, परिवहन और छोटे उद्यमियों के लिए भी बड़े आर्थिक अवसर पैदा होंगे।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि उत्तर बंगाल में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मिरिक के विकास के साथ-साथ दार्जिलिंग को भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की योजना है।
पर्यटन विभाग का मानना है कि इस परियोजना के लागू होने पर मिरिक एक साधारण पर्यटन स्थल से आगे बढ़कर एडवेंचर, प्रकृति और अनुभव आधारित पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। इससे उत्तर बंगाल के पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
