सिलीगुड़ी, 30 मई (नि.सं.)। एक समय राज्य के बड़े कथित भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुकी ‘त्रिफला लाइट’ परियोजना के अवशेष अब सिलीगुड़ी शहर से हटाए जा रहे हैं। शहर की सड़कों पर लगे इन विवादित और निष्क्रिय लाइट पोल को तोड़ने का काम शुरू होते ही एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में आ गया है।
तृणमूल शासनकाल में एसजेडीए (सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी डेवलपमेंट अथॉरिटी) की पहल पर लगाए गए इस प्रोजेक्ट को लेकर करीब 200 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे। हालांकि इस विवाद की गूंज अभी भी बनी हुई है। राज्य में सरकार परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने इस परियोजना के बचे हुए ढांचे को हटाने की पहल की है। हाल ही में प्रशासनिक बैठक के बाद विधायक शंकर घोष के निर्देश पर शहर के विभिन्न हिस्सों में लगे इन बेकार हो चुके स्तंभों को हटाने का काम शुरू किया गया है। हालांकि विधायक ने इस पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले की फाइल दोबारा खोली जा सकती है।
एक समय शहर की सुंदरता बढ़ाने के उद्देश्य से लगाए गए ये लाइट पोल अब पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके हैं और जर्जर लोहे के ढांचे में बदल गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये स्तंभ न केवल भ्रष्टाचार की याद दिलाते हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा रहे हैं।
इसी कारण ‘भ्रष्टाचार का स्मारक’ कहे जाने वाले इन त्रिफला लाइट पोल को अब हटाया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल पुराने ढांचे को हटाने का काम नहीं, बल्कि एक चर्चित विवाद के निशान को मिटाने की कोशिश भी है।
