सिलीगुड़ी,19 जून (नि.सं.)। बारिश उस रात कुछ ज्यादा ही बेरहम थी। सिलीगुड़ी नगर निगम के 46 नंबर वार्ड के चंपासारी इलाके में हर तरफ पानी ही पानी था। लोग अपने घरों से निकलकर सुरक्षित जगहों की तलाश में थे। डर, चिंता और अफरा-तफरी का माहौल था।
इसी बीच, भीड़ में बच्चा चुपचाप आगे बढ़ रहा था। उसके चेहरे पर डर कम और चिंता ज्यादा थी। लेकिन ये चिंता अपने लिए नहीं थी। उसने अपनी छोटी-सी गोद में दो कांपते हुए कुत्ते को संभाल रखा था। चारों तरफ घुटनों तक पानी, तेज बारिश, और अंधेरा… फिर भी उसके कदम नहीं रुके।जहां बड़े-बड़े लोग अपनी जान बचाने में लगे थे, वहीं उस बच्चों ने उन बेजुबान जानों को भी अपनी जिम्मेदारी समझा। वह धीरे-धीरे पानी को चीरते हुए सुरक्षित जगह की ओर बढ़ता गया। कुत्ते उसकी गोद में सिमटे हुए थे, जैसे उन्हें भरोसा हो कि उनका छोटा सा रक्षक उन्हें कुछ नहीं होने देगा।उस पल, इंसानियत किसी बड़ी बात में नहीं, बल्कि उस छोटे से दिल में दिख रही थी। वो बच्चा हमें सिखा गया—मदद करने के लिए उम्र नहीं, बस दिल बड़ा होना चाहिए। उस बच्चे की इंसानियत की ये कहानी हमेशा दिलों में बनी रहेगी।
