भूस्खलन की चुनौतियों के बावजूद टॉय ट्रेन की रफ्तार बरकरार, मई-जून में रिकॉर्ड कमाई  

सिलीगुड़ी, 4 जुलाई (नि.सं.)। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे डीएचआर विश्व प्रसिद्ध टॉय ट्रेन ने साबित कर दिया कि प्राकृतिक आपदाएं चुनौतियां उसकी रफ्तार लोकप्रियता को कम नहीं कर सकतीं है। रास्ते की प्राकृतिक चुनौतियों के कारण कुछ समय के लिए रूक जरूर सकती है, लेकिन थम नही सकती है। 
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार भूस्खलन और लैंडस्लाइड की समस्याओं से जूझने के बावजूद टॉय ट्रेन ने वर्ष 2026 के मई और जून महीने में रिकॉर्ड तोड़ आय अर्जित कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 
यह जानकारी शनिवार को सुकना रेलवे स्टेशन पर आयोजित 145वें विश्व धरोहर हेरिटेज टॉय ट्रेन डे समारोह के दौरान डीएचआर के निदेशक ऋषभ चौधरी ने दी। मालूम हो कि 4 जुलाई 1881 को दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) की ऐतिहासिक टॉय ट्रेन ने पहली बार सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग तक की यात्रा शुरू की थी। इसलिए नार्थ बंगाल पेंटर्स एसोसिएशन की पहल पर विश्व धरोहर हेरिटेज की इतिहास को बताने के लिए 4 जून को टॉय ट्रेन डे पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। 
सुकना रेलवे स्टेशन पर आयोजित 145वें हेरिटेज टॉय ट्रेन डे समारोह में कला, संस्कृति और विरासत संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला। 
उत्तर बंगाल पेंटर्स एसोसिएशन के पहले पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों, विद्यार्थियों, और स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम में सिट एंड ड्रॉ प्रतियोगिता, लाइव पेंटिंग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। 
डीएचआर के निदेशक ऋषभ चौधरी ने बताया कि दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के प्रति देश और विदेश के पर्यटकों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। मई 2026 में टॉय ट्रेन ने लगभग 3 करोड़ 95 लाख रुपये की ऐतिहासिक कमाई की थी। जो जून महीने में इस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ते हुए 3 करोड़ 98 लाख रुपये की आय अर्जित कर नया रिकॉर्ड कायम किया है।  निदेशक ने आगे कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में बार-बार होने वाले भूस्खलन और लैंडस्लाइड टॉय ट्रेन के संचालन के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड एनएचआईडीसीएल के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। आने वाले समय में डीएचआर और एनएचआईडीसीएल संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। जिससे टॉय ट्रेन मार्ग पर आने वाली बाधाओं को दूर कर इस ऐतिहासिक रेल सेवा को और अधिक सुरक्षित एवं सुचारु बनाया जा सके। 

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