सिलीगुड़ी, 20 फरवरी (नि.सं)। सिलीगुड़ी के ईस्टर्न बाईपास के पास स्थित साहुनदी नदी और फाड़ाबाड़ी जंगल क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। वर्षों से नदी में प्रतिमाओं के ढांचे फेंके जाने का आरोप है। विसर्जन के बाद इन्हें हटाया नहीं जाता, जिससे नदी की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
ईस्टर्न बाईपास से कुछ दूरी पर साहुनदी नदी के भीतर बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के ढांचे पड़े दिखाई दे रहे है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विसर्जन के बाद इन्हें यूं ही छोड़ दिया जाता है। इससे नदी का प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो रहा है, पानी प्रदूषित हो रहा है और आसपास का पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है। इसका असर पास के फांड़ाबाड़ी जंगल क्षेत्र पर भी पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह समस्या एक-दो महीने की नहीं बल्कि वर्षों पुरानी है। नदी में जमा हो रहे कचरे से न सिर्फ बदबू फैल रही है, बल्कि नदी और जंगल पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
इस मुद्दे पर डाबग्राम 2 नंबर अंचल की प्रधान मिताली मालाकार पर सवाल उठाए जा रहे है। हालांकि उनका कहना है कि यह मामला वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है और सफाई की जिम्मेदारी उन्हीं की है। वहीं वन विभाग का दावा है कि प्रतिमाओं के ढांचे हटाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित पंचायत की है।
जिम्मेदारी को लेकर दोनों पक्षों के बीच चल रही इस खींचतान के बीच नदी की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। अब सवाल उठ रहा है कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा और कब नदी की सफाई होगी? यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
